नई दिल्ली/23 जून 2026: दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप भी पहले से कहीं अधिक जटिल हो गया है। आतंकवाद, साइबर हमले, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दुरुपयोग और वैश्विक अस्थिरता जैसे मुद्दों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों को एकजुट होकर काम करने का संदेश दिया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की बैठक में प्रधानमंत्री ने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक अनिश्चितताओं और नई तकनीकों से जुड़े जोखिमों का सामना कर रही है। भारत ने इस मंच पर स्पष्ट किया कि बदलती परिस्थितियों में सामूहिक सुरक्षा और साझा रणनीति की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
BRICS सुरक्षा बैठक में आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में BRICS की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान इन मुद्दों पर व्यावहारिक और परिणामोन्मुख सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि इससे वैश्विक सुरक्षा ढांचे को नई मजबूती मिलेगी और सदस्य देशों के बीच विश्वास भी बढ़ेगा।
ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करेगा भारत
बैठक के दौरान भारत ने एक बार फिर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्लोबल साउथ की चिंताओं और आवश्यकताओं को भी मजबूती से आगे बढ़ाएगी।
भारत का उद्देश्य ऐसे वैश्विक वातावरण के निर्माण में योगदान देना है, जहां सुरक्षा, विकास और समावेशिता एक साथ आगे बढ़ सकें। यही सोच BRICS मंच को भी अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
बदलते दौर में नई सुरक्षा चुनौतियों पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। साइबर हमले, डेटा सुरक्षा, डिजिटल अपराध और उभरती तकनीकों का दुरुपयोग अब राष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े मुद्दे बन चुके हैं।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए BRICS देशों के सुरक्षा प्रमुखों ने आपसी समन्वय बढ़ाने, तकनीकी सहयोग को मजबूत करने और आतंकवादी नेटवर्क द्वारा नई तकनीकों के उपयोग को रोकने पर विस्तृत चर्चा की।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
भारत ने बैठक में आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया। साथ ही सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करने, सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय को मजबूत करने और साइबर खतरों से निपटने के लिए साझा रणनीति विकसित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने माना कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक देश के लिए संभव नहीं है। इसके लिए सहयोग, विश्वास और बहुपक्षीय प्रयासों की आवश्यकता है।
नई दिल्ली में आयोजित यह BRICS सुरक्षा बैठक इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में संगठन केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत ने इस मंच से एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी विश्व व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत किया है।










