24 जून 2026|नई दिल्ली: कूटनीति की दुनिया में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए बुधवार को दुनियाभर में इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी मनाया गया। इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विदेश मंत्रालय (एमईए) की महिला अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए देश के कूटनीतिक हितों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की।
दक्षिण कोरिया के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मौजूद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महिला अधिकारियों की तस्वीरों का एक कोलाज साझा किया। उन्होंने लिखा कि इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी के अवसर पर टीम एमईए की सभी महिला अधिकारियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी पर जयशंकर ने सराहा महिला अधिकारियों का योगदान
विदेश मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत के कूटनीतिक हितों को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर देश की पहुंच बढ़ाने में महिला अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय की महिला अधिकारी न केवल विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूती दे रही हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को भी सशक्त बना रही हैं।
जयशंकर का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में कूटनीति और विदेश नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विविध नेतृत्व किसी भी देश की विदेश नीति को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने में मदद करता है।
क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी?
हर वर्ष 24 जून को मनाया जाने वाला यह दिवस कूटनीति के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को पहचान देने और उन्हें सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर इस दिन को आधिकारिक मान्यता दी गई थी।
इस दिवस का उद्देश्य महिला राजनयिकों के कार्यों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना, निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाना और कूटनीति में लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करना है।
कूटनीति में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े ताजा आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ने के बावजूद शीर्ष पदों पर उनकी हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- दुनिया भर में केवल 22.5 प्रतिशत राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि महिलाएं हैं।
- संयुक्त राष्ट्र में 21 प्रतिशत स्थायी प्रतिनिधि ही महिलाएं हैं।
- वर्ष 1947 से अब तक नियुक्त कुल राजदूतों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 7 प्रतिशत रही है।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कूटनीति के क्षेत्र में लैंगिक संतुलन की दिशा में अभी भी लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है।
इस वर्ष की थीम: बहुपक्षीय कूटनीति में महिलाओं का नेतृत्व
इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी 2026 की थीम “बहुपक्षीय कूटनीति में महिलाओं का नेतृत्व” रखी गई है। इस थीम का उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय मंचों पर महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका को प्रोत्साहित करना है।
विमेन इन डिप्लोमेसी सूचकांक के अनुसार, वर्तमान में केवल न्यूजीलैंड, लिकटेंस्टीन और बेलिज ऐसे देश हैं जहां शीर्ष कूटनीतिक पदों पर 50 प्रतिशत महिला राजदूतों की नियुक्ति की गई है। इसे वैश्विक स्तर पर लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
कूटनीति की बदलती दुनिया में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल प्रतिनिधित्व का सवाल है, बल्कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को भी रेखांकित करता है।












