16 जून 2026: स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी ब्रातिस्लावा में एक ऐसी कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसने भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को नई पहचान दी। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी का केंद्र बिंदु भारत का प्राचीन शहर वाराणसी (बनारस) रहा, जिसकी संस्कृति, आध्यात्मिकता और विरासत को स्लोवाक कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों में जीवंत रूप से उकेरा।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कलाकारों की रचनात्मकता की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति देशों के बीच दूरी मिटाने तथा लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
पीएम मोदी बोले- ब्रातिस्लावा में महसूस हुआ बनारस का जुड़ाव
प्रदर्शनी देखने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि ब्रातिस्लावा में बनारस से जुड़ाव महसूस करना बेहद विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि हाल ही में वाराणसी का दौरा करने वाले स्लोवाक कलाकारों ने अपनी कृतियों के माध्यम से शहर की आत्मा, उसकी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक पहल दोनों देशों के लोगों को और करीब लाने का काम करती हैं।
भारत-स्लोवाकिया संबंधों में सांस्कृतिक आयाम हुआ मजबूत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह दो दिवसीय यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही। वर्ष 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला आधिकारिक दौरा था। इस दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौतों पर सहमति जताई।
दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को अब ‘व्यापक साझेदारी’ (Comprehensive Partnership) का दर्जा देने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद भी भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।
यूरोप में बनारस की सांस्कृतिक विरासत की झलक
प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियों के माध्यम से स्लोवाक कलाकारों ने गंगा घाटों, धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और बनारस की ऐतिहासिक पहचान को अपने नजरिए से प्रस्तुत किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उसकी गूंज सुनाई दे रही है।
योग प्रदर्शन से भी प्रभावित हुए प्रधानमंत्री मोदी
ब्रातिस्लावा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत विशेष योग प्रदर्शन भी देखा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम ने दोनों नेताओं का ध्यान आकर्षित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवाओं को योग अपनाते देखना उत्साहवर्धक है। उन्होंने कहा कि योग आज केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक कल्याण का माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार, योग लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण के लिए एक मंच पर ला रहा है।
सर्वोच्च सम्मान से भी सम्मानित हुए पीएम मोदी
स्लोवाकिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से भी सम्मानित किया गया। इसे भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ती मित्रता, विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत और स्लोवाकिया के संबंधों में यह यात्रा केवल कूटनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ब्रातिस्लावा में आयोजित बनारस प्रदर्शनी ने यह भी साबित किया कि संस्कृति और कला अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को नई गहराई देने की क्षमता रखती हैं।










