नई दिल्ली|18 जून 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG Re-Exam 2026 को पूरी तरह सुरक्षित और विवादों से दूर रखने के लिए केंद्र सरकार इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है। 21 जून को आयोजित होने वाली दोबारा परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय वायुसेना को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीते चार दिनों के भीतर वायुसेना ने देशभर में निर्धारित 18 जोन्स तक प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए 200 से अधिक उड़ानें संचालित की हैं।
पिछले वर्ष पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद इस बार प्रशासनिक मशीनरी हाई अलर्ट पर है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया गया है।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए वायुसेना ने संभाली कमान
सूत्रों के मुताबिक इस विशेष अभियान की शुरुआत 13 जून से की गई थी। मिशन के तहत सीलबंद प्रश्नपत्रों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित सुरक्षित वितरण केंद्रों तक पहुंचाया गया। इसके लिए भारतीय वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टरों और भारी मालवाहक विमानों का उपयोग किया गया।
पूरे अभियान को अत्यंत गोपनीय रखा गया है। प्रत्येक चरण पर निगरानी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि प्रश्नपत्रों की आवाजाही के दौरान किसी भी तरह की चूक या हस्तक्षेप की संभावना न रहे।
चार दिन में 200 से अधिक उड़ानें, अब अंतिम चरण की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने के बाद से वायुसेना के विमान लगभग 200 उड़ानें पूरी कर चुके हैं। प्रश्नपत्र पहले क्षेत्रीय केंद्रों तक पहुंचाए गए हैं, जहां से उन्हें निर्धारित समय पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वायुसेना की मदद लेने का मुख्य उद्देश्य समयबद्ध और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना था। उनका कहना है कि इस बार प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि किसी भी स्तर पर लीक या गड़बड़ी की गुंजाइश न बचे।
आखिर क्यों उठाना पड़ा इतना बड़ा कदम?
दरअसल, 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद देशभर में पेपर लीक और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और व्यापक विवाद के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया।
करीब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों से जुड़ी इस परीक्षा को लेकर सरकार पर भरोसा बहाल करने की बड़ी जिम्मेदारी थी। यही वजह है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था में सेना और वायुसेना जैसी संस्थाओं की मदद ली गई है।
लाखों छात्रों की उम्मीदें इस परीक्षा से जुड़ी
देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हजारों परिवार पिछले कई महीनों से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सरकार और परीक्षा से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि इस बार परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और लीक-प्रूफ होगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा सफलतापूर्वक और बिना किसी विवाद के संपन्न होती है तो इससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत होगा। फिलहाल पूरा प्रशासनिक तंत्र इस चुनौतीपूर्ण परीक्षा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने में जुटा हुआ है।












