नई दिल्ली|16 जून 2026: देश के हवाईअड्डों के आसपास तेजी से बढ़ रहे शहरी विकास और उससे जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हवाईअड्डों के आसपास निर्माण नियम तय करना और इस संबंध में नीति बनाना सरकार तथा संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र का विषय है, न कि न्यायिक हस्तक्षेप का।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सीधे तौर पर नीतिगत निर्णयों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में अदालत सीमित दायरे में ही हस्तक्षेप कर सकती है।
अहमदाबाद विमान हादसे का दिया गया था हवाला
यह याचिका शकील शेख की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मातादान ने अदालत को बताया कि देश के कई हवाईअड्डों के आसपास अनियंत्रित शहरी विकास हो रहा है। उनका तर्क था कि ऊंची इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण को लेकर एक समान और प्रभावी नियमों का अभाव है, जो भविष्य में विमानन सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
सुनवाई के दौरान उन्होंने अहमदाबाद में पिछले वर्ष हुए भीषण एअर इंडिया विमान हादसे का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस दुर्घटना ने हवाईअड्डों के आसपास मौजूद संरचनात्मक जोखिमों को उजागर किया है और ऐसे मामलों में स्पष्ट नियामक व्यवस्था की आवश्यकता है।
अदालत ने कहा, नीति निर्धारण का विषय
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि हवाईअड्डों के आसपास निर्माण नियम तैयार करना कार्यपालिका और नीति निर्माताओं का दायित्व है। अदालत ने इस मुद्दे पर कोई निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए याचिका पर आगे सुनवाई नहीं करने का फैसला लिया।
अदालत की टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि इस प्रकार के मामलों में न्यायपालिका सीधे नियम बनाने के बजाय संबंधित सरकारी संस्थाओं पर निर्णय छोड़ना उचित मानती है।
2025 के विमान हादसे ने खींचा था ध्यान
गौरतलब है कि 12 जून 2025 को एअर इंडिया का बोइंग ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान पास स्थित एक मेडिकल कॉलेज परिसर से टकरा गया था।
इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा बीजे मेडिकल कॉलेज के 19 डॉक्टरों और छात्रों की भी मौत हुई थी। दुर्घटना के बाद विमानन सुरक्षा और हवाईअड्डों के आसपास शहरी ढांचे के नियमन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हुई थी।
सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में तेजी से फैलते शहरीकरण के बीच हवाईअड्डों के आसपास निर्माण गतिविधियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से यह साफ हो गया है कि इस दिशा में किसी भी बदलाव या नए नियम की पहल सरकार और नियामक संस्थाओं को ही करनी होगी।
हवाईअड्डों की सुरक्षा, शहरी विकास और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाना आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना रहेगा।











