नई दिल्ली (Tue, 12 May 2026)। भारत और नेपाल के रिश्तों को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। नेपाल में नई सरकार बनने के बाद सीमा और आवाजाही से जुड़े कई फैसलों ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच चर्चा बढ़ा दी है। इसी बीच संकेत मिले हैं कि भारत और नेपाल के विदेश मंत्रियों की जल्द मुलाकात हो सकती है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
नेपाल में बालेन शाह सरकार के गठन के बाद लागू किए गए नए नियमों का असर सीधे तौर पर भारत-नेपाल सीमा पर देखने को मिल रहा है। खासकर सीमा पार व्यापार, निजी वाहनों की आवाजाही और स्थानीय यात्रियों के लिए स्थितियां पहले की तुलना में अधिक सख्त हुई हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच संवाद को लेकर नई उम्मीदें भी बन रही हैं।
India Nepal Relations पर विदेश मंत्रालय की नजर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को जानकारी दी कि नेपाल के नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फोन पर बातचीत कर बधाई दी थी। इस दौरान दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों और सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
प्रवक्ता के अनुसार, प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी संपर्क हुआ है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar को नेपाल की ओर से आधिकारिक निमंत्रण मिल चुका है। हालांकि उनकी यात्रा की तारीख अभी तय नहीं की गई है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं होगी, बल्कि सीमा प्रबंधन, व्यापार और लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत का मंच भी बन सकती है।
नेपाल सरकार के नए फैसलों से बदली सीमा की तस्वीर
भारत और नेपाल के बीच दशकों पुरानी खुली सीमा व्यवस्था दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी पहचान रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग बिना वीजा और पासपोर्ट के एक-दूसरे के यहां आसानी से आते-जाते रहे हैं। लेकिन हाल के महीनों में नेपाल सरकार की नई नीतियों ने इस व्यवस्था में बदलाव के संकेत दिए हैं।
बालेन शाह सरकार की ओर से लागू किए गए नियमों में सीमा पर निगरानी बढ़ाना, वाहनों के पंजीकरण को अनिवार्य करना और ‘भंसार’ शुल्क व्यवस्था को सख्ती से लागू करना शामिल है। अब भारतीय वाहनों को नेपाल में प्रवेश से पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ रहा है। इसके अलावा वाहन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज साथ रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले जहां आवाजाही बेहद सहज थी, वहीं अब जांच और कागजी प्रक्रिया के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय लग रहा है।
व्यापार और पर्यटन पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-नेपाल सीमा पर सख्ती का असर केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। छोटे व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट कारोबार और धार्मिक पर्यटन पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में लोग हर साल नेपाल यात्रा करते हैं।
ऐसे में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की प्रस्तावित मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बातचीत के दौरान सीमा पर नई व्यवस्थाओं को लेकर भारत अपनी चिंताओं से नेपाल को अवगत करा सकता है।
रिश्तों में संतुलन बनाए रखना दोनों देशों की जरूरत
भारत और नेपाल के संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी गहराई से जुड़े रहे हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता अक्सर राजनीतिक तनाव के दौर में भी मजबूती का आधार बना है।
इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि हालिया सख्ती के बावजूद दोनों सरकारें संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करेंगी। विदेश मंत्रियों की संभावित बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













