24 जून 2026|नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने कहा है कि बदलते समय में न्यायपालिका के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अदालतों के प्रति आम लोगों का विश्वास बनाए रखना है। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की ताकत केवल उसके संवैधानिक अधिकारों से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से तय होती है। यही कारण है कि न्यायाधीशों की ईमानदारी, निष्पक्षता और समयबद्ध न्याय देने की प्रतिबद्धता पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है।
मॉस्को में भारतीय सुप्रीम कोर्ट और रूसी संघ के सुप्रीम कोर्ट के बीच आयोजित न्यायिक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने यह बात कही। इस दौरान रूस के सुप्रीम कोर्ट के चेयरमैन इगोर क्रास्नोव समेत दोनों देशों के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
CJI सूर्यकांत बोले- न्यायपालिका की साख ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालतों की विश्वसनीयता किसी भी न्याय प्रणाली की नींव होती है। यदि जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है तो न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने का रास्ता केवल बेहतर न्यायिक आचरण, गहन कानूनी ज्ञान और निष्पक्ष फैसलों से होकर गुजरता है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका को लगातार बदलती सामाजिक और तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप खुद को विकसित करना होगा, लेकिन इसके मूल मूल्य कभी नहीं बदलने चाहिए।
तकनीक न्याय का साधन है, विकल्प नहीं
CJI सूर्यकांत ने न्यायिक व्यवस्था में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने अदालतों की पहुंच को व्यापक बनाया है और आम नागरिकों के लिए न्याय प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक केवल एक सहयोगी उपकरण है। न्यायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में मानवीय विवेक, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का कोई विकल्प नहीं हो सकता। उनके अनुसार, अदालतों के फैसले केवल तथ्यों और कानून की व्याख्या भर नहीं होते, बल्कि उनमें मानवीय परिस्थितियों की समझ भी शामिल होती है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है डिजिटल न्याय तंत्र
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि भारत में न्यायिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। अब बड़ी संख्या में मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग की जा रही है। डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम, दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं ने अदालतों के कामकाज को नई गति दी है।
इन पहलों से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी न्याय तक पहुंच आसान बनी है।
AI की भूमिका पर क्या बोले CJI सूर्यकांत?
न्यायपालिका में AI के इस्तेमाल को लेकर CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कानूनी शोध और न्यायिक फैसलों के अनुवाद जैसे कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अदालतों के निर्णयों को 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के लिए भी AI आधारित तकनीकों की मदद ली जा रही है।
फिर भी उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विवादों का निपटारा करना और अंतिम न्यायिक निर्णय देना पूरी तरह न्यायाधीशों का दायित्व रहेगा। AI सूचना जुटाने, दस्तावेजों के विश्लेषण और प्रशासनिक कार्यों में सहायता कर सकता है, लेकिन न्याय देने का अधिकार और जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के हाथ में ही रहनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दुनिया भर में न्यायिक संस्थानों में AI के बढ़ते उपयोग पर व्यापक चर्चा चल रही है। उनका संदेश स्पष्ट था कि तकनीक न्याय व्यवस्था को मजबूत कर सकती है, लेकिन न्याय का मूल आधार अब भी मानवीय विवेक, निष्पक्षता और जनता का विश्वास ही है।












