नई दिल्ली/03 जुलाई 2026: देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और अल नीनो और सूखे की आशंका के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर हालात का विस्तृत आकलन किया। बैठक में राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, खरीफ फसलों की बुवाई, जलाशयों की स्थिति, बिजली आपूर्ति और किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ एवं भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) भेजने का भी निर्णय लिया गया।
अल नीनो और सूखे की आशंका पर केंद्र सरकार ने बढ़ाई निगरानी
बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार देश के उन क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है, जहां अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति बन सकती है। उन्होंने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकारों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें और किसानों तक स्थानीय मौसम एवं परिस्थितियों के अनुरूप फसल संबंधी सलाह समय पर पहुंचाएं।
बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि यदि वर्षा सामान्य से कम रहे तो किसानों को नुकसान कम उठाना पड़े।
जून में 40 प्रतिशत कम बारिश, खरीफ की बुवाई भी प्रभावित
बैठक में मौसम संबंधी आंकड़ों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जून 2026 में देशभर में सामान्य की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक असर मध्य भारत पर पड़ा, जहां वर्षा में 50.4 प्रतिशत तक की कमी दर्ज हुई।
कम बारिश का सीधा असर खरीफ सीजन की बुवाई पर भी दिखाई दिया। 25 जून तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 23 प्रतिशत घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जुलाई में भी औसत मासिक वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है।
जल, बिजली और कृषि विभागों को दिए गए विशेष निर्देश
समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने जल संसाधन विभाग को देशभर के प्रमुख जलाशयों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने चारा, मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों जैसी कम पानी में उगाई जाने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
इसके साथ ही बिजली मंत्रालय को किसानों और आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध एवं पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सरकार का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो सिंचाई की आवश्यकता बढ़ेगी, ऐसे में बिजली व्यवस्था मजबूत रखना जरूरी होगा।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि देश में चावल, गेहूं सहित आवश्यक खाद्यान्नों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और फिलहाल आवश्यक वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
इन मंत्रालयों और एजेंसियों ने बैठक में लिया हिस्सा
बैठक में गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के अलावा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, उपभोक्ता मामले विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के विशेषज्ञों ने भी अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
असम और अरुणाचल में नुकसान का करेगा केंद्र आकलन
बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल की भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) को असम और अरुणाचल प्रदेश भेजने के निर्देश दिए।
असम के कई जिलों में अब भी बाढ़ का असर बना हुआ है, जबकि अरुणाचल प्रदेश के कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रभावित राज्यों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।











