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परिषदीय विद्यालय 25 जून से खुलेंगे, हर बच्चे के सीखने के स्तर पर रहेगा फोकस

On: June 23, 2026
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परिषदीय विद्यालय 25 जून से खुलेंगे, हर बच्चे के सीखने के स्तर पर रहेगा फोकस
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लखनऊ|23 जून 2026: गर्मी की छुट्टियों के बाद उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालय 25 जून से एक बार फिर बच्चों की चहल-पहल से गुलजार होने जा रहे हैं। हालांकि इस बार केवल नियमित पढ़ाई शुरू करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता को समझते हुए उसके शैक्षिक स्तर में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने नए शैक्षिक सत्र को गुणवत्ता आधारित शिक्षा और सीखने के परिणामों से जोड़ने की तैयारी की है।

मंगलवार को आयोजित यूट्यूब संवाद के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों और राज्य व जिला स्तरीय रिसोर्स पर्सन को नए सत्र के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहां बच्चे सहज महसूस करें, अपनी बात खुलकर रख सकें और शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।

परिषदीय विद्यालयों में हर बच्चे की जरूरत के अनुसार होगी पढ़ाई

अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि नए सत्र में बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन किया जाएगा। जो छात्र अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं, उनके लिए विशेष “कैच-अप ट्रेनिंग” चलाई जाएगी ताकि उनकी शैक्षणिक कमजोरियों को दूर किया जा सके।

उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नजर रखें और समय-समय पर फीडबैक देकर उसे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करें। शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी और वास्तविक शिक्षण घंटों की भी निगरानी की जाएगी।

स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण होगा शुरू

नए सत्र के साथ ही स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन वर्ष आयु के बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बाल वाटिका से जोड़ेंगी। वहीं छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।

इसके अलावा कक्षा पांच से छह में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए संक्रमण काल को सहज बनाने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को सौंपी गई है, ताकि प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर तक उनका शैक्षणिक सफर बिना किसी कठिनाई के आगे बढ़ सके।

पढ़ने की संस्कृति विकसित करने पर रहेगा विशेष जोर

विद्यालयों में केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित शिक्षा नहीं दी जाएगी। बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए पुस्तकालयों से नियमित रूप से पुस्तकें जारी की जाएंगी और प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे की पठन गतिविधि आयोजित होगी।

इसके साथ ही लेखन, कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसी गतिविधियां बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

निपुण अभियान का दायरा अब कक्षा पांच तक

राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी निपुण अभियान को भी नए सत्र में और विस्तार दिया जा रहा है। अब यह अभियान केवल कक्षा एक और दो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को इसके दायरे में शामिल किया जाएगा।

भाषा और गणित के बुनियादी कौशल मजबूत करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित विषयों में सरल एवं स्पष्ट निपुण लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन का प्रशिक्षण छह जुलाई से शुरू होगा, जबकि नवंबर और दिसंबर में निपुण आकलन कराया जाएगा।

शिक्षकों के प्रशिक्षण और संवाद पर भी रहेगा जोर

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि एसआरपी, एसआरजी और मेंटर शिक्षक केवल निरीक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षकों के साथ नियमित संवाद कर उनकी शैक्षणिक चुनौतियों का समाधान करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के अनुभवों को शिक्षा संकुलों में साझा किया जाएगा ताकि अन्य शिक्षक भी उनसे सीख सकें।

उन्होंने शिक्षकों को दीक्षा पोर्टल, आइ-गाट प्लेटफॉर्म और ‘द टीचर ऐप’ का अधिक उपयोग करने की सलाह दी। इन माध्यमों से शिक्षक नवीन शिक्षण पद्धतियों, लेसन प्लान और एनसीईआरटी की गाइडलाइन का अध्ययन कर अपने अध्यापन को और प्रभावी बना सकते हैं।

गर्मी को देखते हुए दिए गए विशेष निर्देश

प्रदेश में जारी गर्मी को देखते हुए विद्यालयों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि सुबह 10 बजे के बाद बच्चों की आउटडोर गतिविधियां न कराई जाएं। साथ ही विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए।

अपने संबोधन के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शिक्षकों से स्वयं भी पढ़ने की आदत विकसित करने, समय प्रबंधन सीखने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी सकारात्मक सोच लाखों बच्चों का भविष्य बदल सकती है।

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