लखनऊ|23 जून 2026: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे की परिस्थितियों, संभावित लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री का रुख बेहद सख्त दिखाई दिया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और विभागों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ अग्निकांड की जांच करेंगे दो वरिष्ठ अधिकारी
मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी में पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। दोनों अधिकारियों को हादसे के हर पहलू की गहन जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार चाहती है कि केवल आग लगने के कारणों की ही नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और आपदा प्रबंधन प्रणाली की भी व्यापक समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
घटना की सूचना मिलते ही रद्द किए कार्यक्रम
अग्निकांड की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने निर्धारित कार्यक्रम तत्काल रद्द कर दिए और सीधे लखनऊ पहुंच गए। उन्होंने घटना स्थल का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया तथा राहत और बचाव कार्यों की जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया।
देर शाम मुख्यमंत्री ने गृह विभाग, अग्निशमन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इसी बैठक में एसआईटी गठन का निर्णय लिया गया।
मंगलवार को मुख्यमंत्री का हाथरस और आगरा का प्रस्तावित दौरा भी रद्द कर दिया गया। हाथरस में उन्हें 548 करोड़ रुपये की लागत वाली 143 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करना था, जबकि आगरा में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा बैठक निर्धारित थी।
इन अहम बिंदुओं की जांच करेगी एसआईटी
जांच दल को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह देखा जाएगा कि संबंधित भवन में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं और क्या निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।
इसके अलावा एसआईटी यह भी जांच करेगी कि अग्नि सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली कितनी प्रभावी थी, नियामक एजेंसियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से किया या नहीं तथा स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया कितनी त्वरित और प्रभावी रही।
जांच के दौरान आग लगने की सूचना मिलने के बाद किए गए बचाव कार्यों, भवन से लोगों की सुरक्षित निकासी और राहत अभियान के संचालन की भी विस्तार से समीक्षा की जाएगी।
जिम्मेदारी तय करने पर रहेगा फोकस
सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच का मुख्य उद्देश्य केवल घटना के कारणों का पता लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि यदि कहीं प्रशासनिक या संस्थागत स्तर पर चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए।
प्रदेश सरकार का मानना है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बेहद आवश्यक है। ऐसे में एसआईटी की रिपोर्ट भविष्य की सुरक्षा नीतियों और जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।












