24 जून 2026|लखनऊ: लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के बाद अब अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
सूत्रों के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने वर्ष 2016 से 2019 के बीच संबंधित क्षेत्र में तैनात रहे 19 अधिकारियों और इंजीनियरों की सूची एसआईटी को सौंप दी है। माना जा रहा है कि इसी अवधि में आवासीय भूखंड पर नियमों को ताक पर रखकर तीन मंजिला व्यावसायिक भवन खड़ा किया गया था, जहां बाद में कोचिंग सेंटर और अन्य कारोबारी गतिविधियां संचालित होने लगीं।
अवैध निर्माण की परतें खोल रही SIT
अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार के नेतृत्व में गठित दो सदस्यीय एसआईटी ने मंगलवार को घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। करीब एक घंटे तक टीम ने भवन के भीतर और आसपास के क्षेत्र का जायजा लिया तथा महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए।
जांच टीम बाद में ट्रॉमा सेंटर भी पहुंची, जहां घायलों से घटना की जानकारी ली गई। उनसे आग लगने के कारण, भवन के भीतर मौजूद सुरक्षा इंतजामों और बाहर निकलने के रास्तों को लेकर सवाल पूछे गए। पुलिस ने पूरे परिसर की ड्रोन कैमरे से वीडियोग्राफी भी कराई है ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए।
जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और LDA से मांगी गई रिपोर्ट
एसआईटी ने जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और एलडीए उपाध्यक्ष से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई और किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही।
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि जिस भवन को एकल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति मिली थी, वह बाद में व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। इतना ही नहीं, भवन को कमर्शियल बिजली कनेक्शन भी मिल गया, जबकि निर्माण और उपयोग दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
LDA की आंतरिक जांच में 19 अधिकारी जिम्मेदार
एलडीए की पांच सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने वर्ष 2016 से 2019 के दौरान तैनात रहे 19 अधिकारियों और इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की है। इनमें जोनल अधिकारी, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और अन्य तकनीकी अधिकारी शामिल हैं।
तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव का नाम भी जांच के केंद्र में है। बताया जा रहा है कि उन्होंने वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया था, लेकिन बाद में वह आदेश वापस ले लिया गया। यही निर्णय अब जांच एजेंसियों की विशेष निगरानी में है।
FSL टीम ने जुटाए अहम साक्ष्य
घटनास्थल पर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने भी जांच की। एफएसएल निदेशक आदर्श कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने मौके से सात मोबाइल फोन, पहचान पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है। इन सभी को तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।
चार आरोपित भेजे गए जेल
मामले में पुलिस ने भवन मालिक समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपितों में भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, एनिमेशन एवं गेमिंग जोन संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेट शॉप एवं क्लीनिक संचालक रामकृष्ण उपाध्याय तथा नेटवर्किंग कार्य से जुड़े सुरेश कुमार शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपितों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सात दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के तुरंत बाद अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर घटनास्थल का निरीक्षण किया था। उन्होंने केजीएमयू में भर्ती घायलों और पीड़ित परिवारों से मुलाकात भी की थी। इसके बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी के गठन के निर्देश दिए गए।
सरकार ने जांच टीम को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अधिकारियों तक भी जवाबदेही तय हो पाती है।










